यथोक्तकारी · सोन्नवण्णम् सेय्द पेरुमाल

Kanchipuram

टेम्पल सर्किट · पढ़ने की गाइड · 8 September 2026

इस मंदिर की यात्रा बनाएँ

यथोक्तकारी · सोन्नवण्णम् सेय्द पेरुमालPhoto: Ssriram mt / Wikimedia Commons · CC BY-SA 4.0

कहानी से शुरुआत

विष्णु कांची में तिरुवेक्का और अष्टभुज को साथ रखें। यहाँ शयन करते प्रभु और तिरुमळिसै आलवार का आत्मीय संबंध यात्रा का प्रमुख प्रसंग है।

स्थल पुराण

राजा अपनी प्रशंसा में गाने से इनकार करने पर कणिकण्णन को निकाल देता है। तिरुमळिसै आलवार शिष्य के साथ जाते हैं और प्रभु से भी साथ चलने को कहते हैं। पेरुमाल उनके पीछे चल देते हैं और कांची अँधेरे में डूब जाती है। पश्चात्ताप करता राजा भक्तों को वापस लाता है; आलवार के अनुरोध पर प्रभु भी लौटते हैं। सोन्नवण्णम् सेय्द पेरुमाल वे हैं जो भक्त के कहने के अनुसार करते हैं।

निर्माता, शिल्प और संरक्षण

बाएँ हाथ का सहारा लिए शयन करती प्रतिमा की विशेषता ASI ने दर्ज की है। मंदिर की पल्लवकालीन उत्पत्ति, चोल दान-अभिलेख और विजयनगरकालीन विस्तार इसकी विभिन्न ऐतिहासिक परतें हैं। इसके साथ तमिल साहित्य की और भी पुरानी स्मृति जुड़ती है।

अपनी यात्रा की तैयारी

खुलने का समय अभी पुष्ट नहीं है। सुझाए गए समय पर दर्शन से पहले इसकी जाँच करें।

यह विष्णु कांची में अष्टभुज के पास और वरदराज वाले नगर-क्षेत्र में है। इसके अपने दर्शन-समय की पुष्टि करें; पास के मंदिरों का समय एक जैसा होना आवश्यक नहीं है।

ठहरकर देखने की जगहें

मुख्य सन्निधि

दिखाई देने पर सिर को सहारा देते बाएँ हाथ पर ध्यान दें। इस विश्राम करते स्वरूप को भक्त के साथ उठकर चल देने वाले प्रभु से जोड़ें।

दर्शन के बाद

जाने और लौटने की कथा क्रम से सुनाएँ। नाम केवल मुद्रा नहीं, प्रभु और भक्त का संबंध बताता है।

स्रोत

कथा और अनुवाद की स्थानीय समीक्षा बाकी है।

Tirumala Tirupati Devasthanams · 108 Vaishnavite Divya Desams, volume 1 · ASI · Temples of Kanchipuram, UNESCO Tentative List submission