काल भैरव मंदिर

भैरवनाथ, वाराणसी

टेम्पल सर्किट · पढ़ने की गाइड · 7 September 2026

इस मंदिर की यात्रा बनाएँ

कहानी से शुरुआत

काशी के कोतवाल काल भैरव हैं। यात्री अपनी यात्रा के लिए उनकी स्वीकृति और आशीर्वाद चाहते हैं। रजत मुख और रक्षा सूत्र उस रक्षक-संबंध के दिखाई देने वाले चिह्न हैं।

स्थल पुराण

काल भैरव को काशी का कोतवाल, यानी रक्षक माना जाता है। उनका आशीर्वाद लेकर नगर में प्रवेश करने या रहने की धार्मिक परंपरा है।

निर्माता, शिल्प और संरक्षण

स्थानीय लोगों और यात्रियों की लगातार उपासना इस मंदिर का महत्व जीवित रखती है। इस गाइड में मौजूदा परिसर के हर भवन की सटीक उम्र का दावा नहीं किया गया है।

अपनी यात्रा की तैयारी

खुलने का समय अभी पुष्ट नहीं है। सुझाए गए समय पर दर्शन से पहले इसकी जाँच करें।

पूजा और नीचे दी गई जगहों को देखने का समय रखें। प्रवेश और तस्वीरों के लिए लगे निर्देश मानें।

ठहरकर देखने की जगहें

दर्शन के समय

दर्शन में मालाओं के बीच रजत मुख पर ध्यान दें; शेष स्वरूप वस्त्रों से ढका रहता है। काशी में आने और विदा होने पर यात्री इन्हीं कोतवाल का आशीर्वाद लेते हैं।

मंदिर का अनुमत अर्पण-स्थल

भैरव रक्षा सूत्र इस मंदिर से जुड़ा रक्षाधागा है। उसे अर्पित होते देखें तो नगर के रक्षक की सुरक्षा के चिह्न के रूप में समझें; भाग लेने से पहले मंदिर के कर्मचारी से रीति पूछें।

स्रोत

कथा और अनुवाद की स्थानीय समीक्षा बाकी है।

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