नागेश्वर ज्योतिर्लिंग

Near Dwarka

टेम्पल सर्किट · पढ़ने की गाइड · 20 September 2026

इस मंदिर की यात्रा बनाएँ

नागेश्वर ज्योतिर्लिंगPhoto: YAKSH75 / Wikimedia Commons · CC BY 4.0

कहानी से शुरुआत

नागेश्वर को द्वारका से सड़क-यात्रा के रूप में रखें। इस पड़ाव का केंद्र ज्योतिर्लिंग दर्शन है। पंक्ति में लगने से पहले सुप्रिय का प्रसंग पढ़ें, ताकि मंडप से होकर बढ़ना भक्त की प्रार्थना से जुड़ सके।

स्थल पुराण

दारुक नामक राक्षस शिवभक्त सुप्रिय को बंदी बना लेता है। कैद में भी सुप्रिय ॐ नमः शिवाय के साथ प्रभु का स्मरण जारी रखते हैं। शिव प्रार्थना स्वीकार कर प्रकट होते हैं, राक्षस को परास्त करते हैं और मुक्ति देते हैं। यहाँ प्रकट स्वयंभू लिंग की नागेश्वर के रूप में पूजा होती है। विपत्ति में अटूट शिवस्मरण इस तीर्थ की कथा का केंद्र है।

निर्माता, शिल्प और संरक्षण

मंदिर द्वारका के विस्तृत तीर्थ-क्षेत्र में आता है। बड़े मंडप के अंत में मुख्य गर्भगृह है, जिससे ध्यान शिवलिंग की ओर जाता है। पास के गोपी तालाब का अपना कृष्ण-प्रसंग है; वह अलग पवित्र स्थल है और उसके लिए अलग भ्रमण आवश्यक है।

अपनी यात्रा की तैयारी

खुलने का समय अभी पुष्ट नहीं है। सुझाए गए समय पर दर्शन से पहले इसकी जाँच करें।

गुजरात पर्यटन इसे द्वारका से लगभग 18 किमी बताता है और केवल सूर्योदय से सूर्यास्त तक का समय देता है। निकलने से पहले दर्शन के समय की पुष्टि करें। सड़क-यात्रा और द्वारका लौटना जोड़ें; यह सोमनाथ के आसपास का पड़ाव नहीं है।

ठहरकर देखने की जगहें

मुख्य दर्शन मार्ग

देखें कि मंडप किस तरह दृष्टि को शिवलिंग की ओर ले जाता है। पंक्ति के साथ चलते रहें; लंबे मनन के लिए अनुमत विश्राम-स्थान चुनें।

दर्शन के बाद

बंदी अवस्था में भी चलती भक्त की प्रार्थना का स्मरण करें। इच्छानुसार शांत भाव से ॐ नमः शिवाय जपकर कथा को प्राप्त दर्शन से जोड़ें।

स्रोत

कथा और अनुवाद की स्थानीय समीक्षा बाकी है।

Gujarat Tourism · Nageshwar Jyotirlinga