बाहरी आधार-पीठ
दोहराती हाथी और मानव आकृतियाँ पहचानें। पत्थर छुए बिना उनका आकार ऊपर की देवमूर्तियों से मिलाकर देखें।
Dwarka
टेम्पल सर्किट · पढ़ने की गाइड · 20 September 2026द्वारका की यात्रा में रुक्मिणी दर्शन के लिए अपना समय रखें। नगर के बाहर स्थित यह मंदिर दुर्वासा, कृष्ण और जल के प्रसंग से द्वारकाधीश से जुड़ता है। दर्शन के बाद बाहरी दीवारों की छोटी मूर्तियों को ध्यान से देखें।
कृष्ण और रुक्मिणी दुर्वासा ऋषि को भोजन का निमंत्रण देते हैं। ऋषि अपना रथ दोनों से खिंचवाकर उनके घर जाना चाहते हैं। मार्ग में रुक्मिणी को प्यास लगती है। कृष्ण पैर के अँगूठे से धरती छूकर गंगा प्रकट करते हैं। रुक्मिणी ऋषि को जल देने से पहले पी लेती हैं। स्वयं को उपेक्षित समझकर दुर्वासा उन्हें कृष्ण से अलग रहने का शाप देते हैं। अलग-अलग मंदिर द्वारका की तीर्थभूमि में इस प्रसंग का स्मरण कराते हैं।
मंदिर की बाहरी सतह पर देवी-देवताओं की मूर्तियाँ हैं; नीचे आधार पर मानव आकृतियों और हाथियों की पंक्तियाँ हैं। मुख्य दर्शन के बाद ये छोटे शिल्प देखने योग्य हैं। बड़े जगत मंदिर से अलग, इस छोटे परिसर में रुक्मिणी की आराधना का अपना परिवेश है।
प्रकाशित दर्शन अवधि: 07:30–20:00 IST
20 September 2026 को समय का मिलान जुड़े स्रोत से किया गया। यात्रा से पहले बदलाव और उत्सव की व्यवस्था की पुष्टि करें। Gujarat Tourism · Rukmini Devi Temple
द्वारका में अपने ठहराव तक लौटने का समय जोड़ें। गुजरात पर्यटन 07:30–20:00 प्रकाशित करता है; पूजा के विराम और उत्सव की व्यवस्था स्थानीय रूप से जाँचें। मानचित्र मंदिर क्षेत्र दिखाता है, सत्यापित वाहन उतारने का स्थान नहीं।
बाहरी आधार-पीठ
दोहराती हाथी और मानव आकृतियाँ पहचानें। पत्थर छुए बिना उनका आकार ऊपर की देवमूर्तियों से मिलाकर देखें।
गर्भगृह दर्शन के बाद
रथयात्रा और जल के प्रसंग का स्मरण करें। इससे द्वारका यात्रा में रुक्मिणी और द्वारकाधीश दोनों के दर्शन का संबंध स्पष्ट होता है।
कथा और अनुवाद की स्थानीय समीक्षा बाकी है।