सारंगपाणि मंदिर

कुंभकोणम

टेम्पल सर्किट · पढ़ने की गाइड · 8 September 2026

इस मंदिर की यात्रा बनाएँ

कहानी से शुरुआत

कमल-सरोवर, ऋषि और पत्थर का रथ यहाँ एक विवाह-कथा में मिलते हैं। आरावमुदन के दर्शन के बाद कोमलवल्ली की कहानी मंदिर से पोट्रामरै तक जानिए।

स्थल पुराण

स्थल-परंपरा के अनुसार हेम ऋषि ने लक्ष्मी को अपनी पुत्री के रूप में पाने के लिए तप किया। वे पोत्रामरै सरोवर में कोमलवल्ली के रूप में प्रकट हुईं। उनसे विवाह करने विष्णु रथ में आए। मंदिर की रथाकार रचना इसी कथा को रूप देती है।

निर्माता, शिल्प और संरक्षण

यहाँ चोल, विजयनगर और नायक शासकों के योगदान मिलते हैं। आरावमुदन के पद नाथमुनि द्वारा दिव्य प्रबंधम की पुनर्प्राप्ति की धार्मिक परंपरा से भी जुड़े हैं।

अपनी यात्रा की तैयारी

पूजा और नीचे दी गई जगहों को देखने का समय रखें। प्रवेश और तस्वीरों के लिए लगे निर्देश मानें।

ठहरकर देखने की जगहें

अनुमत बाहरी परिक्रमा-पथ

पहिया और रथ खींचते पशु का शिल्प खोजिए। कोमलवल्ली से विवाह करने विष्णु के रथ पर आने की कथा यहाँ मंदिर के रूप में दिखाई देती है।

पश्चिमी प्रवेश के बाहर

पोट्रामरै वह कमल-सरोवर है जहाँ हेम ऋषि की कथा में कोमलवल्ली प्रकट होती हैं। रथाकार मंदिर के बाद उसी विवाह-कथा का यह दूसरा स्थान देखिए। सार्वजनिक किनारे पर रहें।

मंदिर का पश्चिमी भाग

पश्चिमी हिस्से में हेम ऋषि का शिल्प पहचानने में सहायता लें। स्थल पुराण में वे कोमलवल्ली के पिता हैं; अब उस पात्र को मंदिर की कला में पहचानिए।

स्रोत

Temple website · history and sacred account · Background references · Nathamuni tradition