श्वेत विनायक मंदिर

तिरुवलंचुळि

टेम्पल सर्किट · पढ़ने की गाइड · 8 September 2026

इस मंदिर की यात्रा बनाएँ

कहानी से शुरुआत

समुद्र-झाग से बने विनायक को इन्द्र फिर उठा नहीं सके; वे यहीं रहे। श्वेत स्वरूप के दर्शन के बाद महीन छेदों वाली पत्थर की पलहनी खिड़की देखिए।

स्थल पुराण

समुद्र-मंथन के समय इन्द्र ने समुद्र के झाग से विनायक का रूप बनाकर पूजा की। बाद में जब वे उसे ले जाने लौटे, स्वरूप हिला ही नहीं; विनायक तिरुवलंचुझि में रहे। श्वेत प्रतिमा पर तरल अभिषेक नहीं होता। स्थल पुराण की स्मृति दैनिक पूजा में बनी रहती है।

निर्माता, शिल्प और संरक्षण

परिसर में चोल काल की वास्तुकला और अभिलेख मिलते हैं। प्रसिद्ध मंदिर के साथ छोटी शिल्प-बारीकियाँ भी कई पीढ़ियों के योगदान की याद दिलाती हैं।

अपनी यात्रा की तैयारी

पूजा और नीचे दी गई जगहों को देखने का समय रखें। प्रवेश और तस्वीरों के लिए लगे निर्देश मानें।

ठहरकर देखने की जगहें

पलहनी खिड़की का स्थान पूछें

पलहनी की जाली में एक छेद और अगले छेद के बीच बची पतली पत्थर की कड़ी देखें। जाली को जोड़े रखते हुए पत्थर हटाना ही इसकी कारीगरी है; आर-पार आती रोशनी में आकृति स्पष्ट होती है।

कबरदीश्वरर मंदिर के खुले भाग

श्वेत विनायक के बाद कपर्दीश्वर के खुले प्राकार में जाएँ। प्रसिद्ध गणेश मंदिर इस बड़े शिवालय का हिस्सा है। पहले दर्शन की छोटी जगह और आसपास के मंडपों के विस्तार को देखिए।

स्रोत

Background references · sacred account & stone window