भारत माता मंदिर

काशी विद्यापीठ, वाराणसी

टेम्पल सर्किट · पढ़ने की गाइड · 8 September 2026

इस मंदिर की यात्रा बनाएँ

कहानी से शुरुआत

यहाँ केंद्रीय रूप संगमरमर में उकेरा भूभाग है। पहले पर्वत और मैदान खोजें, फिर 1936 का वर्ष याद करें; यह स्मारक स्वतंत्रता आंदोलन की कल्पना से देश को देखने का आमंत्रण है।

स्थल पुराण

यह मंदिर के रूप में बना आधुनिक देशभक्ति-स्मारक है। इसके केंद्र में संगमरमर का उभरा हुआ मानचित्र है। इसकी कहानी प्राचीन स्थल-पुराण नहीं, स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ी है।

निर्माता, शिल्प और संरक्षण

शिवप्रसाद गुप्त ने इसे बनवाया और महात्मा गांधी ने 1936 में उद्घाटन किया। मानचित्र को स्वतंत्रता से पहले के ऐतिहासिक संदर्भ में पढ़ें, आज के देशों की सीमाओं के नक्शे की तरह नहीं।

अपनी यात्रा की तैयारी

पूजा और नीचे दी गई जगहों को देखने का समय रखें। प्रवेश और तस्वीरों के लिए लगे निर्देश मानें।

ठहरकर देखने की जगहें

मानचित्र-हॉल खुला हो तो

उभरे हिमालय को खोजकर मैदानों की ओर भूभाग देखें। संगमरमर का यह उभार ऊँचाई और आकृति से भूगोल पढ़ने देता है। आसपास से देखें, शिल्प को न छुएँ।

मानचित्र के आसपास

यह स्मारक गांधी ने 1936 में, स्वतंत्रता से पहले, खोला था। इसका केंद्रीय रूप भूभाग है। उस वर्ष को ध्यान में रखकर नक्शा फिर देखें; इसमें अपने समय की राष्ट्रीय कल्पना दर्ज है।

स्रोत

Incredible India · PTI · history