सोमनाथ गर्भगृह
प्रभास में चंद्र की आराधना और शिव की कृपा को स्मरण करें।
सोमनाथ · प्रभास पाटन
टेम्पल सर्किट · पढ़ने की गाइड · 8 September 2026चंद्र को कृपा देने वाले सोमनाथ का ज्योतिर्लिंग। वर्तमान मंदिर की प्रतिष्ठा 11 मई 1951 को हुई। गर्भगृह, सभा मंडप और नृत्य मंडप के साथ निकट का अहिल्याबाई मंदिर यहाँ आराधना की निरंतरता समझाता है।
रोहिणी के प्रति चंद्र के विशेष अनुराग से दक्ष का शाप मिलता है। प्रभास में शिव की आराधना करने पर चंद्र को राहत मिलती है। भगवान सोम के नाथ, सोमनाथ के रूप में पूजित हैं।
वर्तमान मंदिर की प्रतिष्ठा 11 मई 1951 को हुई। गर्भगृह, सभा मंडप और नृत्य मंडप के साथ निकट का अहिल्याबाई मंदिर यहाँ आराधना की निरंतरता समझाता है।
पूजा और नीचे दी गई जगहों को देखने का समय रखें। प्रवेश और तस्वीरों के लिए लगे निर्देश मानें।
सोमनाथ गर्भगृह
प्रभास में चंद्र की आराधना और शिव की कृपा को स्मरण करें।
मुख्य मंदिर और अहिल्याबाई मंदिर
मंडपों की रचना और निकट के मंदिर के साथ पूजा की निरंतरता समझें।